शुक्रवार, 9 सितंबर 2011

Release 1101 कुछ शब्द व शब्दों के सरल अर्थ और भावार्थ



सत्यपाल =
सत्यपाल “विधाता की विधि का विधान” का ही नाम है, यह मूल उद्देश्य को प्रकट करने में व बोलने मे व समझने मे आसानी को ध्यान मे रख कर, स्थापित किया गया छोटा शब्द है 

अपराध =
अस्तित्व मे, जीवन को बेअसर व नष्ट करने वाली सोच, योजना, कार्य, शिक्षा, सन्देश, संकेत, खेल, मनोरंजन, साहित्य, प्रचार, व इनसे मिलते जुलते कार्य जो इसी तरह का प्रभाव डालने मे सक्षम हों, चाहे वह व्यवस्था मे लिखे जा चुके हों या नही यह सब अपराध हैं
 
घोर अपराध =
अपराधी, अपराध करने के लिये, अपने विरोधी, अपराध समाप्त करने वाले को, जब अपराधी साबित करने के लिये, योजना बनाता है, योजना को लागू करता है, योजना मे सफलता पाता है, तब और अपराध के लिये, ईश्वर द्वारा निर्मित शारीरिक, संरचना जिसमे (मानव, जीव, जंतु, वनस्पति, भू सम्पदा, आत्मा, ईश्वरीय संकेत रूपी आदेश जैसे (टोस)) को, विकल्प होते हुये, ऐश के लिये, जख्मी करता है, नष्ट करता है, संरचना को खाता है, इस्तेमाल करता है, लेन देन करता है, तो यह घोर अपराध है            

हिंसा
सत्यपाल व्यवस्था को, अपमानित, बेअसर, नष्ट करने की चाहत रख कर, किसी अन्य को, अपने साथ लेना, मजबूर करना, मानसिक दुविधा मे बाँध देना, खुरच देना, जख्मी व अपाहिज कर देना, हत्या कर देना व इन्ही उद्देश्यों को पूरा करने वाले अन्य कार्यवाहियां हिंसा है        
अहिंसा
हिंसा के विपरीत सत्यपाल को सम्मान देने वाली और असरदार बनाने वाली, लागू करने वाली, प्रचार करने वाली, सभी कार्यवाहियां अहिंसा है,

प्रस्ताव
सत्यपाल को और असरदार बनाने के लिये, लागू करने के लिये , प्रचार करने के लिये , सम्मान देने के लिये , व इन्ही उद्देश्यों को पूरा करने वाले सभी कार्य जो सत्यपाल के तहत लिखे जा चुके है और जो नही लिखे जा सके है उन्हें सदैव सम्मान दिया जायेगा, स्वीकार किया जायेगा, सत्य पाल मे जोडा जायेगा, व यदि कभी भी ऐसा प्रतीत होता है कि यह प्रस्ताव सत्यपाल को बेअसर व नष्ट कर रहा है तो उसे तुरंत रद्द कर के पुनः सत्यपाल को स्थापित कर दिया जायेगा
                      
दंड
अपराध को नियंत्रित करने के लिये दी जाने वाली मानसिक बन्दिश व दुविधा, अधीनता, विवशता, दूरियाँ, गुप्तता,  सभी सूचना नष्टीकरण, दंड है

सुधार तरीका 
यानी बाल दंड, बच्चों को सत्यपाल के तहत सिखाते समय यदि बच्चा शैतानी करता है तो बच्चों के साथ सुधार तरीका अपनाया जायेगा, यह तभी असर करेगा जब बालक के पास बालक को दी जाने वाली शिक्षा के अलावा अन्य शिक्षा का ज्ञान नहीं होगा
सम्मान न. काट देना
सम्मान कम करना
दोस्तों से अलग करना
गन्दा बच्चा,
फेल बच्चा,
ढीला बच्चा,
कमजोर बच्चा,
कम अकल बच्चा,
सुस्त बच्चा, आदि पुकारना
जमीन पर बैठो
दीवार की तरफ मुँह करके खडे हो जाओ
बच्चे के बाल मजाकिया अन्दाज़ मे कर के जैसे सींग उग गया हो, करके दोस्तों के व परिजनों के पास भेजना
पर ध्यान रहे कि बालक पर असर पडने की सीमा से आगे ना जाया जाये यानी कोई एक सुधार तरीका ही इस्तेमाल किया जाये
जब यह तरीका असर कम कर दे
तब दूसरा फिर तीसरा इस क्रम से चला जाये
यह शिक्षा के लिये व्यवस्थापक की सच्ची महनत है दंड नही

क्रूरता
सत्यपाल को बेअसर व नष्ट करने की चाहत को पूरा करने के लिये, दी जाने वाली शिक्षा, मानसिक बन्दिश व दुविधा, अधीनता, विवशता, दूरियाँ, गुप्तता, मस्तिस्क सूचना नष्टीकरण, अपहरण, खुरचना, किरोदना, गोदना, अपाहिज करना, मनसिक व शारीरिक दर्द देना, घायल करना, इन्ही उद्देश्यों को पूरा करने के लिये साहित्य, कहानियां, चित्र, चल चित्र, आवाज़, संगीत, उपहार, प्रोत्साहन क्रूरता है,                      

युद्ध
अधिकतर की हां की मरजी की, सहमति प्राप्त करने मे असफल व्यक्ति व समूह, जो सत्यपाल का विरोध करता है, जो अपराध करता है, या जो जीत या मौत के इरादे से गुप्त या खुलकर कार्यवाहियाँ करता है, व इसके अलावा सत्यपाल के तहत जो लिखा जा चुका है और जो नही लिखा जा सका है पर जो इन्ही उद्देश्यों की पूर्ती के लिये किया जा रहा है युद्ध है

           
विकास
वि+का+स=विकास
वि का मतलब विशाल, विश्व स्तरीय, विराट, विकट, विश्वासी     
का का मतलब कार्य काम कार्यवाही काज   
स का मतलब समान, सभी, सत्य, सही
यानी समान रूप से सत्य को स्थापित करने वाली कार्यवाहियां

विनाश
वि+नाश=विनाश 
वि का मतलब विशाल, विश्व स्तरीय, विराट, विकट, विश्वासी    
नाश का मतलब नष्ट
यानी विशाल, विश्व स्तरीय, विराट, विकट, विश्वास का अंत

मनोरंजन
मन+उ+रंग+जन,
मन = समझ
उ = उमंग, चाहत
रंग = खुशी
जन = मानव
यानी आपकी समझ, आपकी चाहत पूरी करने वाली, मानवों द्वारा दी गई सही खुशी मनोरंजन है



      
     
        

गुरुवार, 8 सितंबर 2011

Release 1100 लोकतंत्र के तहत धरती वासियों की, धरती वासियों के व्यवस्थापकों से प्रार्थना, कि वह भारत के व्यवस्थापकों को लोकतंत्र के तहत बाध्य करें, कि वह लोकतंत्र के सिद्धांतों का पालन करते हुये, धरती, जीवन व लोकतंत्र की रक्षा के लिये, चलाये जा रहे अभियान के सन्देशों को, हर धरती वासी तक पहुँचाने के लिये, मीडिया को बाध्य करने वाले आधार को, धरती वासियों को उपलब्ध कराने का कष्ट करें, जो लोकतंत्र के तहत धरती पर माननीय न्यायालयों व यू. एन. द्वारा स्वीकार करने योग्य हो,

Release 1100
लोक तंत्र के तहत धरती वासियों की,
धरती वासियों के व्यवस्थापकों से प्रार्थना,
कि वह भारत के व्यवस्थापकों को
लोकतंत्र के तहत बाध्य करें,
कि वह लोकतंत्र के सिद्धांतों का पालन करते हुये,
धरती, जीवन व लोकतंत्र की रक्षा के लिये, चलाये जा रहे अभियान के सन्देशों को,
हर धरती वासी तक पहुँचाने के लिये,
मीडिया को बाध्य करने वाले आधार को,
धरती वासियों को उपलब्ध कराने का कष्ट करें,
जो लोकतंत्र के तहत
धरती पर माननीय न्यायालयों व यू. एन. द्वारा स्वीकार करने योग्य हो, 
श्याडो


 यूनाईटेड नेसन 



पहचान
श्याडो
Shyawhdo
Shyam’s world help dedicate organize
श्री श्याम द्वारा निर्मित विश्व मे प्रत्येक असहाय की सहायता के लिये समर्पित समूह

काम
  1. धरती के केन्द्र से आकाश में चमकते अंतिम प्रकाश बिन्दु तक प्रत्येक मानव जीव जंतु प्राकृतिक सम्पदा की सेवा सुरक्षा करना
  2. अकाल मौत के मुँह मे जा रही धरती व धरती के जीवन की रक्षा करना
  3. 100% कानून शुद्ध करना
  4. 100% कानून लागू करना
  5. जन सेवकों को जन सेवा के लिये बाध्य करना

नारा
जय धरती जय मानवता
विश्व सेवक व रक्षक
श्याडो

पता  एस बाईस पुल प्रहलाद पुर नई दिल्ली 110044 भारत 
वेब पता  http://Shyawhdo.blogspot.com   
ईमेल  shyawhdo@gmail.com
मोबाइल 9868247312

सेवा में,
      मुख्य प्रबन्धक महोदय,
      यूनाइटेड नेसन,
      धरती, 
     
और ईमेल द्वारा प्रतिलिपि प्राप्त कर्ता: यूनाइटेड नेसन, ब्रिटिस काउंसेल, वाइट हाउस, लोक सभा पति, राज्य सभा पति, लोक सभा लीडर, लोक सभा सैक्रेटरी, भारत की सुप्रीम कोर्ट, निर्वाचन आयोग, भारतीय सूचना एवम प्रसारण मंत्रालय, दिल्ली की हाई कोर्ट, मुख्य मंत्री दिल्ली, सी.बी.आई., कमिस्नर दिल्ली पुलिस, श्री अण्णा हज़ारे, श्री रामदेव, श्री आशाराम बापू, श्री रवि शंकर, टाइम्स ग्रुप, श्री मति किरण वेदी, अर्विन्द केजरीवाल, स्वामि अग्निवेश, प्रशांत भूषण, शांति भूषण, आइ बी एन 7, इंडिया टूडे, इंडिआ टीवी, जोइंट कमिस्नर पुलिस विजिलैंस, एग्ज़ीक्यूटिव डाईरैक्टर एम टी एन एल, सारदा गन, दिल्ली गन, स्टार न्यूज़, ग्रह मंत्रालय, सुरक्षा मंत्रालय, भारत की राष्ट्रपति, President of the General Assembly in UN, and all speaker in Un G.A. and S.C.M.Herzegovina in UN, Brazil in UN , China in UN, Colombia in UN, Lebanon in UN, Department of Economic and Social Affairs in UN, General Assembly Affairs Branch, Mr. Saijin Zhang (Chief) , Mr. Kenji Nakano ,Ms. Sonia Elliott ,Mr. Ziad Mahmassani ,Ms. Anne Kwak ,Ms. Mériem Heddache (List of speakers) ,Ms. Mary Muturi (Information on plenary elections and candidatures) ,Ms. Antonina Poliakova ,Mr. Carlos Galindo (Membership of Main Committees) ,Ms. Ilene McGrade (UN Journal)
,                                                    

विषय :
लोकतंत्र के तहत धरती वासियों की, धरती वासियों के व्यवस्थापकों से प्रार्थना, कि वह भारत के व्यवस्थापकों को लोकतंत्र के तहत बाध्य करें, कि वह लोकतंत्र के सिद्धांतों का पालन करते हुये, धरती, जीवन व लोकतंत्र की रक्षा के लिये, चलाये जा रहे अभियान के सन्देशों को, हर धरती वासी तक पहुँचाने के लिये, मीडिया को बाध्य करने वाले आधार को, धरती वासियों को उपलब्ध कराने का कष्ट करें, जो लोकतंत्र के तहत धरती पर माननीय न्यायालयों व यू. एन. द्वारा स्वीकार करने योग्य हो, 


हमारी धरती स्तर पर मान्यता के सबूत
  1. धरती का सबसे विशाल और निडर देश अमेरिका के राष्ट्रपति वराक ओबामा जी का हमारे लिये सन्देश भेजना धरती पर हमारी मान्यता को दर्शाता है, उनके हम को करीब 13 मेल प्राप्त हुये है, जिसमे उन्होंने हमको अपने से बात करने और इस मुद्दे को खतम करने के लिये प्रस्ताव भेजे है, जिसमे अंतिम मेल जो कि 1.9.2011 को आया है, जिसे देखने के लिये हमारी रिलीज़ 1097 देखे और हमारी धरती स्तर की मान्यता को जाने, इसके अलावा इन 13 मेलों (सन्देशों) मे हमे हजारों करोडों के उपहार देने के भी प्रस्ताव भेजे गये है, जिन्हे हमने अस्वीकार कर दिया है    

  1. ब्रिटेन की तरफ से अब तक करीब 5 मेलों (सन्देशों) द्वारा करीब 50 लाख हजार करोड़ रुपये उपहार मे देने के लिये प्रस्ताव आये है, जो हमे हमारे अभियान को रोकने की बोली के सिवाय कुछ नही लगते,

  1. भारत मे जनता पार्टी के डा. सुब्रमण्यम स्वामी जी ने करीब 420 एम पी और 4042 एम एल ए को हमसे खरीदने का प्रस्ताव भी भेजा है, जिसका जबाब भी हमने ना करके दिया है

  1. हमारी धरती स्तर की मान्यता के विषय मे जानने के लिये धरती की सबसे बडी मीडिया साधन जिसने गूगल, फेस बुक, विकिपीडिया, ट्वीटर, एम.एस.एन. और ब्लोग स्पोट हमारे विषय मे क्या प्रचार कर रहे हैं यह जानने के लिये shyawhdoinformation, shyawhdo, pohinin, ssnin शब्दों द्वारा खोज करें और धरती स्तर पर हमारे हमारे मार्ग, समर्थकों, विरोधियों और हमारी सरल और निष्कलंक जीवनशैली को देखें समझें और हमारी मान्यता को जाचें, फिर धरती, जीवन और लोकतंत्र के तहत आज़ादी को ध्यान मे रख कर स्वतंत्रता पूर्वक फैसला लें                    


हमारे जीवन काल की अहमियत
हमारी उम्र के हिसाब से यदि हम 100 वर्ष तक जिये तो पुनः ताजा होने मे लगा समय और दिनचर्या का समय निकालने के बाद हमारे जीवन मे करीब 25 साल ही बचते है
इन 25 सालों मे हमे नीचे लिखे काम पूरे करने है
 
  1. अकाल मौत के मुँह मे धकेली जा रही धरती व धरती के जीवन व लोकतंत्र को मौत के मुँह मे जाने से रोकना है
  2. धरती पर “विश्व स्तरीय समान निश्चिंत आध्यात्मिक स्वर्गीय व्यवस्था” को लागू करना है
तो आप समझ चुके होंगे कि यदि अस्तित्व मे सबसे कीमती किसी का समय है
तो वह हमारा है
सबसे ऊँचा पद किसी का है
तो वो भी हमारा है
इस लिये हमे उम्मीद है कि आप हमारे जीवन काल का पूरा खयाल रखेंगे
जो सही मायने मे धरती के जीवन काल और मानव के अस्तित्व के जीवन काल व लोकतंत्र का यानी आपके हितों का खयाल होगा    
     



विवरण
लोकतंत्र के तहत धरती वासियों की, धरती वासियों के व्यवस्थापकों से प्रार्थना, कि वह भारत के व्यवस्थापकों को लोकतंत्र के तहत बाध्य करें, कि वह लोकतंत्र के सिद्धांतों का पालन करते हुये, धरती, जीवन व लोकतंत्र की रक्षा के लिये, चलाये जा रहे अभियान के सन्देशों को, हर धरती वासी तक पहुँचाने के लिये, मीडिया को बाध्य करने वाले आधार को, धरती वासियों को उपलब्ध कराने का कष्ट करें, जो लोकतंत्र के तहत धरती पर माननीय न्यायालयों व यू. एन. द्वारा स्वीकार करने योग्य हो

पहला चरण
यदि आपने इस आवेदन के तहत की गई प्रार्थना को पूरा ना कराने का,
या पूरा कराने का सिर्फ प्रदर्शन करने का,
या विलम्ब करा कर प्रार्थना को रद्द करवाने के लिये विवश करने का,
या अन्य असंख्य राजनैतिक तरीकों का इस्तेमाल करके आवेदन को वापस लेने के लिये मजबूर करने का फैसला ले लिया है, तो, सिर्फ तो,
लोक तंत्र के तहत हमे लिखित मे जबाब देने का कष्ट करें
धरती वासी कब तक इंतज़ार करें?
किस आधार पर धरती के व्यवस्थापकों पर विश्वास करें ?
सिर्फ धरती वासी ही लोकतंत्र के तहत क्यों चलें ?
धरती वासी, धरती वासियों के व्यवस्थापकों को लोकतंत्र के तहत नियंत्रित क्यों ना करें ?
धरती वासी अपने और धरती के व्यवस्थापकों के बीच असमानता को क्यों ना समान करें?
धरती वासी धरती पर लोकतंत्र, मानव जीवन अस्तित्व, व धरती की रक्षा के लिये
धरती वासियों की (विश्व स्तरीय, समान, निश्चिंत, स्वर्गीय, आध्यात्मिक, स्वर्गीय, व्यवस्था) को शुद्ध लोकतंत्र के कानून “विधाता की विधि का विधान” के तहत लागू क्यों ना करें?

दूसरा चरण
यदि अभी भी आप का जबाब हमारे लिये ना है तो सिर्फ तो
हम आपको और आपके असमान अशुद्ध लोकतंत्र के नाम पर भेद भावी ऐस तंत्र को क्यों ना त्यागें,

तीसरा चरण
यदि अब भी आप ने भेद भाव जारी रखा तो
आत्म सुरक्षा के लिये ईश्वर जैसा चाहते है वैसा सबको करना ही होगा

प्रार्थना
इस लिये धरती वासी अति विनम्रता पूर्वक आपसे प्रार्थना करते हैं कि
धरती वासियों के अभियान को पूरा करने मे अपने कर्तव्य निभायें व
धरती, धरती पर मानव जीवन व धरती पर शुद्ध लोकतंत्र को लागू करने के लिये अपना वचन पूरा करें, अन्यथा अधिकतर देश आपकी गलत कार्यवाहियों से परिचित भी है और नाराज भी
अधिकतर देश, जैसी कानून व्यवस्था, पारदर्शिता, सम्मान चाहते हैं, उनको हम वैसा देने में पूरी तरह समर्थ है, धरती स्तर की समस्याओं का लगातार समाधान देना हमारा करीब 300 सालों का अनुभव सदैव धरती वासियों के साथ है, हम बहतर विश्व के अभियान की जगह सत्य को धारण करना यानी सत्य का पालन करना यानी सत्यपाल की धारणा का समर्थन करते है, बहतर विश्व के लक्ष्य जैसे अनेक सही मकसद हमारे लक्ष्य के साथ अपने आप उतपन्न होंगे, आपको इश बात को समझना चाहिये, आखिर हम आपके और आप हमारे है/       

जय धरती जय मानवता
विश्व सेवक व रक्षक
श्याडो
  
             

   
   

बुधवार, 7 सितंबर 2011

Release 1099 कृपया ministry of law and justice से हमे उस आधार को सरल हिन्दी मे लिखित मे दिलवाने का कष्ट करें जो मीडिया को, धरती, जीवन व लोकतंत्र की रक्षा करने वाले अभियान का प्रचार करने के लिये बाध्य कर सके

पहचान
श्याडो
Shyawhdo
Shyam’s world help dedicate organize
श्री श्याम द्वारा निर्मित विश्व मे प्रत्येक असहाय की सहायता के लिये समर्पित समूह

काम
  1. धरती के केन्द्र से आकाश में चमकते अंतिम प्रकाश बिन्दु तक प्रत्येक मानव जीव जंतु प्राकृतिक सम्पदा की सेवा सुरक्षा करना
  2. अकाल मौत के मुँह मे जा रही धरती व धरती के जीवन की रक्षा करना
  3. 100% कानून शुद्ध करना
  4. 100% कानून लागू करना
  5. जन सेवकों को जन सेवा के लिये बाध्य करना


पता  एस बाईस पुल प्रहलाद पुर नई दिल्ली 110044 भारत 
वेब पता  http://Shyawhdo.blogspot.com   
ईमेल  shyawhdo@gmail.com
मोबाइल 9868247312

सेवा में,
      भारत की संसद की मुख्य प्रबन्धक महोदया
      व अन्य वरिष्ठ अधिकारी गण महोदय / महोदया
      कार्यालय, भारत की संसद   

और ईमेल द्वारा प्रतिलिपि प्राप्त करता: यूनाइटेड नेसन, ब्रिटिस काउंसेल, वाइट हाउस, लोक सभा पति, राज्य सभा पति, लोक सभा लीडर, लोक सभा सैक्रेटरी, भारत की सुप्रीम कोर्ट, निर्वाचन आयोग, भारतीय सूचना एवम प्रसारण मंत्रालय, दिल्ली की हाई कोर्ट, मुख्य मंत्री दिल्ली, सी.बी.आई., कमिस्नर दिल्ली पुलिस, श्री अण्णा हज़ारे, श्री रामदेव, श्री आसाराम बापू, श्री श्री रवि शंकर, टाइम्स ग्रुप, श्री मति किरण वेदी, अर्विन्द केजरीवाल, स्वामि अग्निवेश, प्रशांत भूषण, शांति भूषण, आइ बी एन 7, इंडिया टूडे, इंडिआ टीवी, जोइंट कमिस्नर पुलिस विजिलैंस, एग्ज़ीक्यूटिव डाईरैक्टर एम टी एन एल, सारदा गन, दिल्ली गन, स्टार न्यूज़, केन्द्रिय महालेखा अधिकारी, भारतीय कानून मंत्रालय अपने विभागों सहित,                                                     

विषय : कृपया ministry of law and justice से हमे उस आधार को सरल हिन्दी मे लिखित मे दिलवाने का कष्ट करें जो मीडिया को, धरती, जीवन व लोकतंत्र की रक्षा करने वाले अभियान का प्रचार करने के लिये बाध्य कर सके







हमारी धरती स्तर पर मान्यता के सबूत
  1. धरती का सबसे विशाल और निडर देश अमेरिका के राष्ट्रपति वराक ओबामा जी का हमारे लिये सन्देश भेजना धरती पर हमारी मान्यता को दर्शाता है, उनके हम को करीब 13 मेल प्राप्त हुये है, जिसमे उन्होंने हमको अपने से बात करने और इस मुद्दे को खतम करने के लिये प्रस्ताव भेजे है, जिसमे अंतिम मेल जो कि 1.9.2011 को आया है, जिसे देखने के लिये हमारी रिलीज़ 1097 देखे और हमारी धरती स्तर की मान्यता को जाने, इसके अलावा इन 13 मेलों (सन्देशों) मे हमे हजारों करोडों के उपहार देने के भी प्रस्ताव भेजे गये है, जिन्हे हमने अस्वीकार कर दिया है    

  1. ब्रिटेन की तरफ से अब तक करीब 5 मेलों (सन्देशों) द्वारा करीब 50 लाख हजार करोड़ रुपये उपहार मे देने के लिये प्रस्ताव आये है, जो हमे हमारे अभियान को रोकने की बोली के सिवाय कुछ नही लगते,

  1. भारत मे जनता पार्टी के डा. सुब्रमण्यम स्वामी जी ने करीब 420 एम पी और 4042 एम एल ए को हमसे खरीदने का प्रस्ताव भी भेजा है, जिसका जबाब भी हमने ना करके दिया है

  1. हमारी धरती स्तर की मान्यता के विषय मे जानने के लिये धरती की सबसे बडी मीडिया एम एस एन, गूगल, फेस बुक, विकिपीडिया, ट्वीटर, और ब्लोग स्पोट हमारे विषय मे क्या प्रचार कर रहे हैं यह जानने के लिये shyawhdoinformation, shyawhdo, pohinin, ssnin शब्दों द्वारा खोज करें और धरती स्तर पर हमारे समर्थकओं, विरोधियों और हमारी सरल और निष्कलंक जीवनशैली को देखें समझें और हमारी मान्यता को जाँचे, फिर धरती, जीवन और लोकतंत्र को ध्यान मे रख कर स्वतंत्रता पूर्वक फैसला लें                   

हमारे जीवन काल की अहमियत
हमारी उम्र के हिसाब से यदि हम 100 वर्ष तक जिये तो आराम और दिनचर्या का समय निकालने के बाद हमारे जीवन के करीब 25 साल ही बचते है
इन 25 सालों मे हमे नीचे लिखे काम पूरे करने है
 
  1. अकाल मौत के मुँह मे धकेली जा रही धरती व धरती के जीवन को मौत के मुँह मे जाने से रोकना
  2. धरती पर “विश्व स्तरीय समान निश्चिंत आध्यात्मिक स्वर्गीय व्यवस्था” लागू करना
तो आप समझ चुके होंगे कि यदि अस्तित्व मे सबसे कीमती किसी का समय है
तो वह हमारा है
सबसे ऊँचा पद किसी का है
तो वो भी हमारा है
इस लिये हमे उम्मीद है कि आप हमारे जीवन काल का पूरा खयाल रखेंगे
जो सही मायने मे धरती के जीवन काल और मानव के अस्तित्व के जीवन काल का खयाल होगा    










शब्द और शब्दों के सरल भावार्थ 

आधार = कानून, नोटिफिकेसन, सर्कुलर, ओर्डिनेंन्स, गाइड लाइन, नियम, शर्त, आदेश, प्रथा, अहम व्यक्ति की सोच व यदि कोई अन्य प्रक्रिया व प्रावधान हो, तो उसका नाम, कोड, लागू करने की तारीख, उससे सम्बन्धित प्रावधान, प्रक्रिया व किये जा चुके निर्णय (एस सी सी)
जिसे माननीय न्यायालय अस्वीकार ना कर सके        

सरल हिंदी = आम इंसान की समझ मे आने वाली हिन्दी बोली   

लिखित = जिसे माननीय न्यायालय, संसद व यूनाइटेड नेसन स्वीकार करता हो  

मीडिया = जो समूह धरती पर प्रचार करने के लिये सरकारों के कानूनों के तहत पंजीकृत हों,
         व सरकारों से जनता की सम्पत्ति (ज़मीन, भवन, धन, निवास, मशीन, सुविधायें व
         अन्य सहायतायें) प्राप्त कर चुके हों     
धरती = जिस जगह जीवन हो 

जीवन = ईश्वर के तत्वों के निश्चित समय व अनुपात मे क्रिया शील हो कर जन्मा शरीर जो ईश्वर के तत्वों के सही अनुपात के बिगडने पर व समाप्त होने पर पुनः मर जाता है, इस बीच के समय मे ईश्वर इस शरीर मे प्राण और डाल देते है, प्राण के शरीर के साथ मिलते ही चेतना का जन्म होने लगता है, शरीर प्राण और चेतना सम्पूर्ण जीव को जन्म देता है, जीव के जन्म से मौत के बीच के समय को जीवन कहते है     

लोकतंत्र, मानव और कानून = अकल्पनीय प्रजातियों मे एक प्रजाति ने घोर तपस्या कर ईश्वर को प्रसन्न कर अकल्पनीय प्रजाति की समानता, निष्पक्षता, निडरता, श्रद्धा से सेवा सुरक्षा करने के लिये ताकत बुद्धि का वरदान माँगा ईश्वर को यह काम किसी ना किसी को माध्यम बना कर खुद करना ही था, ईश्वर ने यह काम जिस प्रजाति को माध्यम बना कर दिया वह प्रजाति मानव कहलाई, मानव का मतलब था मान+व मान का मतलन सम्मान व का मतलब वह यानी अन्य, अंजान, यानी जो अंजान को मान देगा ध्यान रखेगा वह मानव कहलाया, मानव ने राजा बन कर सभी प्रजातियों को मान सम्मान सेवा सुरक्षा दी, राजा जिन नियमों के तहत सभी प्रजातियों को सम्मान व समानता के साथ सेवा सुरक्षा और कर्तव्य देता था, उन नियमों के संग्रह को राजतंत्र कहते थे, पर अपने करम को पूरा ना कर पाने के कारण ऐस की बीमारी ने अस्तित्व को अपनी चपेट मे ले लिया, फिर राजा की जगह लोक यानी समूहों ने समानता, निष्पक्षता, निडरता, श्रद्धा, के साथ अस्तित्व मे जन्मी सभी प्रजातियों की सेवा सुरक्षा का भार अपने ऊपर ले लिया, लोक तंत्र की खासियत ये थी कि एक दरिद्र भी बडे जन सेवक पर आरोप लगा कर जन सेवक को जबाब देने के लिये बाध्य कर सकता था, जन सेवक का हिसाब जांच सकता था. अपराधी जन सेवक को दंडित करवा सकता था, इन्ही नियमों उदाहरणों का तिथि सहित संग्रह लोक तंत्र का कानून कहलाया                   

रक्षा = ईश्वरीय वरदान, राज तंत्र व लोक तंत्र के कानून के तहत न्याय, सेवा, सुरक्षा देने का
      मतलब रक्षा करना था

मानवीयता = अन्य, परायों, अपराधियों को मान देने के संसकार, दूसरे के लिये काम करना
           जान देना, बिना अपने स्वार्थ के, जो कानून से उंचा स्थान रखते है, जो
           अपराधी को माफ करने की महानता भी रखते है, ऐसे ही महानता के कामों के
           उदाहरण, कामों के आधारों का संग्रह, मानवीयता कहलाती है        




महोदय,
        कृपया ministry of law and justice से हमे उस आधार को सरल हिन्दी मे लिखित मे दिलवाने का कष्ट करें जो मीडिया को, धरती, जीवन व लोकतंत्र की रक्षा करने वाले अभियान का प्रचार करने के लिये बाध्य कर सके

पहला चरण  
यदि भारतीय लोकतंत्र के व्यवस्था करता हमे यह ना देने का फैसला कर चुके है   
तो जबाब ना देने का आधार, सरल, लिखित, मे देने का कष्ट करें

दूसरा चरण  
यदि आप ने पहले चरण का भी जबाब ना देने का फैसला कर लिया है
तो सभी मांगों को आर टी आई कानून 2005 के तहत आपातकालीन मैटर के तहत
प्राप्ति, आपकी धन की माँग़, व हमारी माँगों के जबाब हमे 3 दिनों मे भेजने का कष्ट करें

तीसरा चरण
यदि आप दूसरे चरण का भी जबाब ना देने या किसी और के पास भेजने या बेअसर जबाब देने या कठिन शब्दों का जबाब या ना समझ मे आने वाला जबाब देने का फैसला ले चुके हैं
तो सिद्ध हो जाता है
कि आप ने अपने कर्तव्यों का पालन ना करके
मानवता द्रोह, भू द्रोह, व देश द्रोह किया है
जिसके लिये आपको माननीय धरती वासियों के सामने शपथ सहित अपनी बेगुनाही का जबाब देना होगा

चौथा चरण
यदि आप ये सोच रहे है कि सभी बलीय अधिकारी और जज तो हमारे आदमी है गलत कानून (खामोशी, विलम्ब, बेअसर जबाब, घुमाना, गुम करना) का सहारा ले कर आप ऐसे ही ऐस करते रहेंगे कोई आपका कुछ नही बिगाड सकता, तो आप का अनुभव सही कह रहा है, पर हम आप लोगों की कर्तव्य हीनता के कारण धरती, जीवन व लोकतंत्र की हो रही हत्या को नही होने देंगे,
हम यह मामला यूनाइटेड नेसन मे उठायेंगे,     

पांचवा चरण
यदि अभी भी आप हमारी सही माँग को पूरा करने में असफल रहते हैं तो आपको यह सूचित किया जाता है कि धरती वासियों की सभा मे यह मामला जांच के लिये विलम्बित है और जांच के दौरान धरती स्तर पर लोकतंत्र के व्यवस्थापकों की कर्तव्य हीनता के सबूत धरती वासियों को मिल चुके है, जो अपनी कार्यवाही जारी रखेंगे, यदि आप को लग रहा है कि इससे भी आपको कोई फर्क नही पडता तो आप सही सोच रहे हैं, पर हम जन सेवकों को यह कहने का मौका नही देना चाहते कि धरती वासियों ने समान, क्रमिक, विधिक, व्यवहारिक, न्यायिक, मानवीय, कार्यवाही नही की,












छठा चरण
धरती वासियों ने, धरती, जीवन व लोकतंत्र की रक्षा के कर्तव्य को पूरा कराने के बदले जन सेवकों के समूह को धन, सम्पत्ति, सम्मान, उपहार, व अधिकार, वोट समझौते के तहत दिये,
पर जन सेवकों मे ऐश करने की आदत पड गई, जिसके कारण धरती, जीवन व लोकतंत्र करीब 95% घायल हो कर अकाल मौत के दरवाजे तक पहुंच गये, तब ईश्वर ने पुनः धरती वासियों को माध्यम बना कर रक्षा करने का फैसला ले लिया, और घोषणा कर दी, कि जन सेवक वोट का समझौता कायम रखने मे असफल रहे है, इस लिये समझौता फेल हो चुका है, क्यों कि समझौता फेल हो चुका है, इस लिये धरती वासी अब वोट समझौते के तहत जन सेवकों को धन, सम्पत्ति, सम्मान, उपहार, देने के लिये मजबूर नही हैं, व जन सेवकों को दिये गये सभी अधिकार वापस लिये जाते हैं व अब जन सेवकों के आदेश मानने को विवश नही है, व सभी धरती वासी आत्म सुरक्षा के लिये हर कार्यवाही करने के लिये स्वतंत्र है, व जन सेवकों को समझौते के तोडने के बदले कार्यवाही व दंडित करने व मानवीयता के तहत माफ करने का अधिकार रखते हैं
यदि आपने अभी भी हमारी माँगों को अस्वीकार किया तो
धरती वासियों के पास उपर कहे गये के  अनुसार करने के सिवाय कोई रास्ता नही बचता 
     
सातवां चरण
यदि अभी भी आप धरती वासियों की मांग को नही देना चाहते तो
धरती वासी विशाल सैलाब के रूप मे एकत्रित होकर
पहले भारत मे फिर धरती पर
धरती वासियों का “विधाता की विधि का विधान” लागू कर देंगे
केवल धरती वासी उन्ही जन सेवकों को अपना सकेंगे   
जो परमात्मा के संकेतों के आधार के आदेश पर प्रकट हुये
“विधाता के विधि के विधान” को श्रद्धा सहित स्वीकार करेगा
बाकी जन सेवकों से प्रार्थना है
कि वह अपनी शंका दूर करने के लिये
लाइव टैलीकास्ट पर अपने सवाल, जबाब, विचार, व लिखित मे बात चीत करें
और धरती वासियों का बहुमत प्राप्त करें
यदि धरती वासियों का बहुमत प्राप्त ना कर सके तो “विधाता की विधि के विधान” को स्वीकार करें या युद्ध मे धरती वासियों को हरा दें

आज हर बुद्धिजीवी पीडित धरती वासी सिर्फ हमारे इशारे का इंतजार कर रहा है
पर हमे अपने मानवीय सिद्धांत और अपनी जिम्मेदारियों का एहसास है
 
जय धरती जय मानवता
विश्व सेवक व रक्षक
श्याडो